मैं अभी तक हारा नहीं हूं
आज छत्रपति शिवाजी टर्मिनल के नाम से विख्यात विक्टोरिया टर्मिनल्स स्टेशन पर एक मूंगफली बेचने वाला विगत ३० वर्षों से अपना धंधा कर रहा है। यह अशिक्षित मूंगफली वाला यहाँ अपनी पत्नी के साथ रहता है। इस दम्पत्ती के दो बेटे हें। वर्षों से में उसे उसी स्टेशन के प्लेटफोर्म पर देखता आ रहा हूँ, लेकिन विगत दो माह से मेने उसे प्लेटफोर्म पर नहीं देखा। उसके स्थान पर अपने को उसका रिश्तेदार बताने वाले एक दूसरे मूंगफली वाले को बैठे पाया। मैंने उससे उस मूंगफली वाले के बारे में पूछा। इस पर उसने बताया की इस वक्त वह अमेरिका गया है।उसका जवाब सुनकर मेरे आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही फ़िर मेने पूछा की आख़िर वह अमेरिका कैसे और क्यों गया है? इस पर उसने खुलासा किया की उसका बेटा पड़ने खासकर फिजिक्स में बहुत तेज था और उसे अमेरिका के एक कालेज में अध्ययन हेतु प्रवेश मिला है। बेटे को अमेरिका सरकार की ओर से वजीफा मिला है और अपने बेटे के साथ ही वह भी अमेरिका गया है। उस मूंगफली विक्रेता का नाम यशवंत तांबे था। वह एक गाना गया करता था, जो की इस प्रकार है:बेच जरूर दिया है किस्मत ने मुझे समय के हाथों, पर में बेचारा नहीं हूँ। में थक जरूर गया हूँ दोस्तों, पर अभी तक हरा नहीं हूँ। अकेला हूँ, तनहा हूँ, पर तन्हाई से डरा नहीं हूँ। में फिर उठ खडा हुआ हूँ दोस्तों, जिंदा हूँ अभी तक मरा नहीं हूँ,इसमें कितनी सच्चाई है, ३0 वर्षों तक मूंगफली बेचने के बाद यशवंत ने यह सिध्ध कर दिया है की वह मरा नही है। कोई भी उसकी अवहेलना नहीं कर सकता है। फंडा यह है की आप कभी यह न सोचें की किस्मत ने आपको मार डाला है।