नाम की गफलत से बचें
कर्मचारियों के एम् जैसे नाम स्टाफ के बीच समस्या पैदा कर सकते हैं। खास मौकों पर कम्पनी के एचआर विभाग को कर्मचारियों के नाम को लेकर गफलत से निपटना चाहिए
सेरिडोन टैबलेट बनाने वाली कंपनी रोष प्रोडक्ट लि को एक समय एक विचित्र किस्म की समस्या से दो चार होना पड़ रहा था। इस कंपनी के महाप्रबंधक का नाम डाक्टर काशीनाथ कॉल था। सीरप विभाग में भी इसी से मिलते जुलते नाम वाला एक ओपरेटर, कशी विश्वनाथन था। कॉल एक कश्मीरी थे और कामकाज के मामले में काफी सख्त थे। इसके अलावा निर्माण प्रक्रिया के बरे में वह गहरी जानकारी रखते थे। उन्हें सीरप में महारत हासिल थी। उनके साथ समस्या यह थी की वे जब भी उस विभाग में राउंड लगाने जाते थे, तो दुसरे वर्कर विश्वनाथन को कशी कहकर पुकारने लगते थे, जो डाक्टर कॉल का शुरुआती और संक्षिप्त नाम था। इससे बचने के लिए एचआर विभाग ने सबसे पहले डाक्टर कॉल का नाम बदल दीया। उन्हें तत्काल प्रभाव से डाक्टर के एन कॉल कहकर सम्भोदित किया जाने लगा। वे इसी नाम से कागजों पर हस्ताक्षर करने लगे। सभी वरिष्टों को उन्हें नये नाम से पुकारने के लिए कहा गया।
हाल ही में में ग्लोबल इन्वेस्टर मीत के दौरान इंदौर में था। वाहन मेरी मुलाकात टाटा टी के अकाउंट मैनेजर कृष्ण अय्यर से हुई। संयोग से अय्यर का नाम टाटा टी के उपद्यक्ष कृष्ण कुमार से मिलता-जुलता हैं। में अय्यर से इस बारे में पूछा के वे इस समानता से पैदा हुई गफलत से कैसे बचते हैं? अय्यर नें बड़ी सता से बताया की हर कोई मुझे अय्यर कहता हैं ओर उपाध्यक्ष को उनके सम्कक्षी कृष्णा कहकर बुलाते हैं।
फंडा यह हैं की खास मौकों पर कम्पनी के एच आर विभाग को कर्मचारियों के नाम को लेकर गफ्लातों से निपटना चाहिऐ।