उत्पादकों के समक्ष संवेदनशीलता की चुनौती
हाल ही में मुंबई महानगर में एक सर्वेक्षण किया गया। इसमें पाया गया की युवा पीड़ी का धुम्रपान के प्रति ज्यादा रूझान नहीं है । दुसरे शब्दों में कहें तो युवा वर्ग की प्राथमिकता सूची में धुम्रपान इसलिए नहीं है क्योकि इससे उनके कुछ मित्रों को एलर्जी होती है यानी यह उन्हें पसंद नहीं है हालांकि ये युवा व्यक्तिगत रूप से धूम्रपान के प्रति मोह जताते हैं, मगर इसका एक वर्ग अपने दोस्तों के दबाव में इसे छोड़ देता है । कुछ लड़को ने तो खुलेआम यह स्वीकार किया की माता-पिता के बजाए मित्रों का दबाव धूम्रपान की लत छुडाने में ज्यादा कारगर साबित होता है। एक रोचक बात यह भी है की इसके आदी युवाओं पर विपरीत-सेक्स का दबाव भी काफी पड़ रहा है और कारगर साबित हो रहा है । अमेरिका में हाल में ही गठित एक गैर-लाभ आधारित संगठित परफ्यूम फाउन्डेशन का विश्वास है की लोगों को अगर कोई परफ्यूम पसंद नहीं होता, तो वे इसका प्रयोग करने वालों का साथ छोड़ देते हैं, यहाँ तक की इसकी वजह से दंपत्तियों के बीच तलाक भी हो सकता है। इस फ़ाउन्डेशन ने कुछ अनुठे तथ्य भी पेश किये है, मसलन:- एक ही कार्यालय में काम करने वाले लोग अक्सर एसे कर्मचारियों से दूर रहना पसंद करते हैं जिनके लगाए परफ्यूम वे पसंद नहीं करते। फिर भले ही वह कर्मचारी दूसरी केबिन में बैठता हो।
इसी तरह का एक मामला अमेरिका में बर्गर बेचने वालों से संबंधित है। ये प्याज-रहित बर्गर के निर्माण को तरजीह दे रहा है। ताकि कंपनियों के एक्ज़क्युतिव की मीटिंग बेरोकटोक चल सके। दरअसल बात यह है की अमरीकी लोग मीटिंग में जाने से पहले लंच में बर्गर खाने के आदी है। एक अध्ययन के दौरान यह चौकाने वाली बात सामने आई की प्याज- रहित बर्गर बनाने बाली कंपनियों के बर्गर एक्ज़क्युतिव-क्लास में बडे पैमाने पर पसंद किए जा रहे है, और बेचे जा राहे हैं। बजाय ब्रान्डड और प्याज-वाले बर्गर के। ऐसा इसलिए था की मीटिंग के दौरान ज्यादातर लोग होते है, जिन्हें मुंह से निकलने वाली प्याज के गंध पसंद नहीं आती ।
ऊपर जो दो तीन उदाहरण दिए गए हैं, उनसे एक सामान्य बात उभरकर सामने आती है, वह यह की तीनो उदाहरणों का संबंध मानव संवेदनशीलता से है. यदि लोगों को कुछ चीस पसंद नहीं है तो उनके प्रति उत्पादकों और निर्माताओं को संवेदनशीलता दिखानी पड़ती है।
फंदा यह है के उधोगों और कम्पनियों को भविष्य में मानव संवेदनशीलता के प्रती जागरूक होना पडेगा। उन्हें अपने उत्पाद और उनके ग्राहक के प्रति ही नहीं, बल्कि जो उनके ग्राहक नहीं है, उनका भी ध्यान करना पडेगा। एसे लोग अपने प्रभाव के इस्तेमाल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके बाजार पर विपरीत असर डाल सकते हैं .